अत्याचार अधिनियम (अध्याय - 3)

अध्याय- 3

बाहर निकालना
11. सम्भाडवित अपराध कारित करने वाले व्यक्ति को हटाना :-

(1) जहां विशेष न्यायालय का पुलिस रिपोर्ट या शिकायत पर समाधन हो जाता है कि कोई व्यिक्ति संविधान के अनुच्छेरद 244 में निर्दिष्ट5 ''अनुसूचित क्षेत्रों'' या ''जनजातिय क्षेत्रों'' में शामिल किए गए किसी क्षेत्र में इस अधिनियम के अध्यांय 2 के अधीन सम्भकवतया कोई अपराध कारित करने वाला है, वह लिखित आदेश द्वारा, ऐसे व्याक्ति को उस क्षेत्र की सीमा से, ऐसे रास्तेष द्वारा और ऐसे समय के भीतर जैसा आदेश में विनिर्दिष्टी हो, निकल जाने का आदेश दे सकेगा, और ऐसे क्षेत्र में जिससे उसे निकल जाने का निर्देश दिया गया था ऐसी काला‍वधि के लिए जो दो वर्ष से अधिक नहीं होगी जैसी कि आदेश में विनिर्दिष्टल की गई हो, वापिस न आए।
(2) विशेष न्यानयालय, उपधारा (1) अधीन आदेश के साथ, उस उपधारा के अधीन निर्देशित व्याक्ति को उन आधारों की सूचना देगा, जिन पर ऐसा आदेश किया गया है।
(3) विशेष न्यायालय, उपधारा (1) के अधीन, जारी किए गए आदेश को, आदेश की तिथि से 30 दिनों के भीतर उस व्यशक्ति द्वारा, जिसके विरूद्ध ऐसा आदेश किया गया है या उसकी ओर से किसी अन्यव व्यथक्ति के प्रत्याेवेदन पर, लिखित कारणों को अभिलिखित करने आदेश को उपांतरित या विखंडित कर सकेगा।


12. क्षेत्र से स्वेयं को हटाने में व्यकक्ति की असफलता और हटने के बाद उसमें प्रवेश पर प्रक्रिया :-

(1) यदि कोई व्यपक्ति जिसको धारा 10 के अधीन किसी क्षेत्र से स्वबयं को हटाने के लिए निर्देश जारी किया गया है, उपधारा (2) के अधीन विशेष न्यारयालय के लिखित आदेश के अलावा-
(क) यथा निर्देशित रूप में स्वेयं को हटाने में असफल रहता है, या
(ख) स्व यं को इस प्रकार हटाकर आदेश में निर्दिष्ट अवधि के भीतर ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो विशेष न्याियालय उसको गिरफ्तार करवा सकेगा और ऐसे क्षेत्र के बाहर ऐसे स्थावन को पुलिस अभिरक्षा में हटवा सकेगा, जैसा कि विशेष न्यानयालय विनिर्दिष्ट् करें।
(2) विशेष न्याकयालय, लिखित आदेश द्वारा, किसी व्य क्ति जिसके सम्ब2न्धष में धारा 10 के अधीन आदेश दिया गया है, को उस क्षेत्र में जिससे उसे स्व यं को हटा लेने का निर्देश दिया गया था, ऐसी अस्था यी अवधि के लिए और ऐसी शर्तों के अध्यतधीन, जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्टे हो, आने की अनुज्ञा दे सकेगा और अधिरोपित शर्तों के पालन के लिए प्रतिभूति सहित या प्रतिभूति रहित अन्ध पत्र के निष्पािदन की अपेक्षा कर सकेगा।
(3) विशेष न्या यालय किसी भी समय ऐसी किसी अनुज्ञा को विखंडित कर सकेगा।
(4) कोई व्य्क्ति, जो ऐसी अनुज्ञा के साथ, ऐसे क्षेत्र में वापस आता है जहां से स्वययं को हटाने के लिए निर्देशित किया गया था, अधिरोपित शर्तों का पालन करेगा और अस्थाकयी अवधि की समाप्ति पर, जिसके लिए वह वापस आने के लिए अनुज्ञात था ऐसी अस्थापयी अवधि के समापन के पहले ऐसी अनुज्ञा के विखण्डपन पर, स्वकयं को ऐसे क्षेत्र के बाहर हटा लेगा और धारा 10 के अधीन विनिर्दिष्टक अनवसित भाग में बिना नई अनुज्ञा के वहां वापस नहीं आएगा।
(5) यदि कोई व्य क्ति, अधिरोपित किसी भी शर्त के पालन में या तदनुसार अपने को हटाने में असफल रहकता है या स्यंि को इस प्रकार हटाकर बिना नई अनुज्ञा के ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करता है या वापस आता तो विशेष न्या यालय उसे गिरफ्तार करवा सकेगा और ऐसे क्षेत्र के बाहर ऐसे स्थाान को, जैसा कि विशेष न्याायालय विनिर्दिष्टस को, पुलिस अभिरक्षा में हटवा सकेगा।

13. व्याक्ति, जिसके विरूद्ध धारा 10 के अधीन आदेश किया गया है, का माप, फोटाग्राफ इत्या्दि लेना :-

(1) प्रत्येमक व्येक्ति, जिसके विरूद्ध धारा 10 के अधीन आदेश दिया गया है, यदि विशेष न्याटयालय द्वारा ऐसा अपेक्षित किया जाए, पुलिस अधिकारी द्वारा अपना माप और फोटोग्राफ लिए जाने के लिए अनुज्ञात करेगा।
(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्टट व्य क्ति, जब उसका माप या फोटोग्राफ लेने के लिए अनुज्ञात करने की अपेक्षा की जाती है, अपना ऐसा फोटोग्राफ या माप लेने में बाधा पहुंचाता है या इन्काऐर करता है, तब उनका लेना सुनिश्चित करने के लए सभी आवश्यफक उपायों का किया जाना वैध होगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन फोटोग्राफ या माप लेने की अनुज्ञा से इन्कावर या बाधा पहुंचाने को भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 186 के अधीन अपराध समझा जाएगा।
(4) जहां धारा 10 के अधीन कोई आदेश विखण्डित कर दिया जाता है, वहां उपधारा (2) के अधीन लिए गए सभी माप और फोटोग्राफ (निगेटिव सहित) नष्ट कर दिए जाएंगे या उस व्यफक्ति को दे दिए जाएंगे जिसके विरूद्ध ऐसा आदेश दिया गया है।

14. धारा 10 के अधीन आदेश के अनुपालन न करने पर दंड :-

धारा 10 के अधीन विशेष न्यायालय द्वारा जारी किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करने वाला कोई भी व्य क्ति ऐसे कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।