राज्य अनुसूचित जाति आयोग किन-किन बातों का संज्ञान नहीं लेता

राज्य अनुसूचित जाति आयोग किन-किन बातों का संज्ञान नहीं लेता

01. जो अनुसूचित जाति/वर्ग से नहीं हो।
02. गैर अनुसूचित जाति से संबंधित प्राप्त ऐसे प्रार्थना पत्र जिनका संबंध अनुसूचित जाति के उत्पीड़न से न हो।
03. ऐसे प्रकरण जो मुख्यतः राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हो या निका संज्ञान उक्त आयोग द्वारा ले लिया गया हो।
04. जो प्रकरण/प्रार्थनापत्र न्यायालय में विचाराधीन हो।
05. सेवा संबंधी मामले जो सरकार सेवक द्वारा स्वयं ना देकर किसी अन्य व्यक्ति के नाम से दिये गये हो छत्तीसगढ़ सरकार कर्मचारी आचरण नियमावी 1968 के अनुसार न हो।
06. सेवा संबंधी मामले जिनमें उपलब्ध विभागीय प्रतिकार न लिया गया हो सिवाय उन मामलों के निमें आयोग को यह लगे कि सुसंगति नियमों का सक्षम स्तर पर अनुपालन न किया जा रहा हो।
07. ऐसे मामलों जिनका आयोग द्वारा पहले ही संज्ञान लिया जा चुका हो।
08. लाइसेंस परमिट, आवास एवं अनुदान दिलाये जाने संबंधी अनुरोध या संस्तुति करने विषयक मामले सिवाय उन मामलों के जिनमें नियम उल्लंघन आदि के कारण न्याय न मिल रहा है। तथा ऋण संबंध मामले ऋणी द्वारा दूसरे पक्ष से अनुबंध किया गया हो।
09. जो प्रार्थनापत्र देने की तिथि से पांच वर्ष से अधिक पुराने हों।
10. श्रमिक संगठनों/यूनियनों/एसोसिएशनों से प्राप्त संदर्भ जो नीति विषयक न होकर व्यक्ति विशेष की शिकायत से संबंधित हो जिसमें उस व्यक्ति को आयोग को सीधे अनुरोध करने का अवसर प्राप्त है।
11. आपसी लड़ाई/झगड़े/दंफा फसाद संबंधित क्षेत्र के आरक्षी केन्द्र में रिपोर्ट उपरान्त मामला न्यायालय में विचाराधीन हो।
12. ऐसे प्रार्थना पत्र जो फर्जी जाति से संबंधित हो तथा प्रकरण शासकीय कर्मचारी/अधिकारी से संबंधित हों।